रीवा में पटाखा गोदामों के निरीक्षण के दौरान एक्सपायर अग्निशामक यंत्र, अपर्याप्त पानी और पहली मंजिल पर पटाखों का असुरक्षित भंडारण मिलने से प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
रीवा (मध्य प्रदेश)। दीपावली त्योहार से ठीक पहले रीवा शहर में जिला प्रशासन और पुलिस तंत्र की घोर लापरवाही और सुरक्षा मानकों के प्रति अनदेखी की पोल खुल गई है। मैदानी क्षेत्र स्थित थोक पटाखा व्यापारियों के गोदामों पर राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने निरीक्षण की औपचारिकता तो निभाई, लेकिन इस कार्रवाई ने प्रशासनिक व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घनी आबादी और संवेदनशील इलाकों के आसपास करोड़ों रुपये के आतिशबाजी स्टॉक का असुरक्षित भंडारण किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहा है।
एक्सपायर सिलेंडर और पानी का एक ड्रम सुरक्षा के नाम पर सिर्फ छलावा
राजस्व और पुलिस टीम की दबिश के दौरान पटाखा गोदामों में आग से निपटने के इंतजाम पूरी तरह से हवा-हवाई मिले गोदामों में रखे अग्निशामक यंत्र की वैधता काफी पहले समाप्त हो चुकी थी। आपात स्थिति से निपटने के लिए परिसर में न तो पर्याप्त बालू मिली और न ही पानी की कोई सुचारू व्यवस्था थी। तीन-चार लाइसेंस वाले विशाल गोदामों में महज एक ड्रम पानी रखकर रस्म अदायगी की गई थी।
फर्स्ट फ्लोर पर अवैध भंडारण
विस्फोटक अधिनियम के स्पष्ट नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए पहली मंजिल पर पटाखों का असुरक्षित जमावड़ा पाया गया। हुजूर एसडीएम जितेंद्र तिवारी ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताएं कि निरीक्षण के दौरान व्यापारी यह कहते सुने गए कि उन्हें पहली मंजिल पर पटाखों का भंडारण न करने के नियम की जानकारी नहीं थी। यह तर्क स्वयं प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कटघरा खड़ा करता है। सवाल उठता है कि लाइसेंस रिन्यू करते समय फायर सेफ्टी विभाग और तहसील प्रशासन ने व्यापारियों को दिशा-निर्देश क्यों नहीं दिए थे।
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