स्टॉक एक्सचेंजों को नियंत्रित करने वाली संस्था भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन और इसके वरिष्ठ अधिकारियों को अपनी संपत्तियों और देनदारियों को सार्वजनिक करना चाहिए।
स्टाक एक्सचेंज नियामक सेबी चेयरमैन, वरिष्ठ अधिकारियों को संपत्तियों का खुलासा करने का सुझाव
सीवीसी प्रत्यूष सिन्हा की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति ने दिया सुझाव
नई दिल्ली।
स्टॉक एक्सचेंजों को नियंत्रित करने वाली संस्था "भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड" (सेबी) के चेयरमैन और इसके वरिष्ठ अधिकारियों को अपनी संपत्तियों और देनदारियों को सार्वजनिक करना चाहिए। एक उच्च स्तरीय समिति ने नियामक निकाय सेबी को ये सुझाव देते हुए कहा है कि कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए यह जरूरी है। सेबी की 1992 में स्थापना स्टॉक एक्सचेंजों को नियंत्रित करने, वित्तीय बाज़ार में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना तथा आम निवेशकों के हितों की रक्षा करने के उद्देश्य से की गयी थी। पर हाल में सेबी और पूर्व अध्यक्ष माधवी पुरी बुच पर तमाम अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। इन्हीं आरोपों के बाद मार्च में सेबी के कार्यकलापों पर सुझाव देने के लिए समिति का गठन किया गया था।
पूर्व मुख्य सतर्कता आयुक्त प्रत्यूष सिन्हा की अध्यक्षता वाली समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि सेबी बोर्ड के सभी सदस्यों और कर्मचारियों को व्यापारिक गतिविधियों और पारिवारिक संबंधों के साथ अन्य पेशेवर और हितों का प्रारंभिक, वार्षिक, घटना आधारित और संस्थान छोड़ने संबंधी खुलासा करना चाहिए। समिति की रिपोर्ट सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय सौंपी गई है।
प्रत्यूष सिन्हा की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा है कि चेयरमैन व सदस्यों के पंद व लेटरल एंट्री पदों के लिए आवेदकों को नियुक्ति प्राधिकारी के समक्ष वित्तीय और गैर-वित्तीय प्रकृति के वास्तविक, संभावित और अनुमानित हितों के टकराव के जोखिमों का खुलासा करना होगा। चेयरमैन, पूर्णकालिक सदस्य व मुख्य महाप्रबंधक और उससे ऊपर के स्तर के कर्मचारियों की संपत्तियों और देनदारियों का विवरण देना होगा। बोर्ड के अंशकालिक सदस्यों को छूट दी जा सकती है, क्योंकि वे सेबी की रोजाना की नियामक गतिविधियों को नहीं संभालते हैं।
समिति में इंजेती श्रीनिवास उपाध्यक्ष थे। सदस्यों में दिग्गज कारोबारी उदय कोटक, जी महालिंगम, सरित नाफा व आर नारायणस्वामी शामिल थे। समिति के कार्यक्षेत्र में हितों के टकराव को नियंत्रित करने वाली नीतियों और ढांचों की समीक्षा करना, किसी भी कमियों या अस्मष्टताओं की पहचान करने जैसे विषय भी शामिल हैं। हितों के टकराव व खुलासा से संबंधित चिंताओं को उठाने हेतु एक तंत्र का सुझाव भी दिया गया है।
मार्च में सेबी बोर्ड ने सदस्यों व अधिकारियों द्वारा संपत्ति, निवेश, देनदारियों व अन्य संबंधित मामलों के खुलासे से संबंधित प्राषधानों की समीक्षा के लिए समिति गठित करने का निर्णय लिया था। यह काम सेबी की पूर्व प्रमुख माधवी पुरी बुच पर लगे आरोपों के बाद उठाया गया है। बुच पर हितों के टकराव के कारण अदाणी समूह खिलाफ जांच रोकने का आरोप लगाया गया था।
याद रहे सेबी की पूर्व चेयरमैन माधवी पुरी बुच और उनके पति पर पिछले साल हिंडनबर्ग रिसर्च ने काफी गंभीर आरोप लगाये थे। हिंडनबर्ग ने आरोप लगाया था कि बुच व उनके पति के पास बरमूडा और मॉरीशस की संस्थाओं में छिपी हुई हिस्सेदारी थी, जो अदाणी समूह के संस्थापक गौतम अदाणी के बड़े भाई द्वारा भी प्राप्त की गई थी।
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